बात बनती चली गई-1
विजय पण्डित घर में हम तीन लोग ही रहते थे- मैं, मेर…
मेरी स्नेहा चाची
मेरा नाम तनवीर है, मैं जयपुर में रहता हूँ। मैंने …
बुआ ने मुझे चोदा
प्रेषक : रॉकी गुरु जी को प्रणाम, सभी कुंवारी लड़कियो…
मेरा गरूर-चकनाचूर
लेखिका : अंजू वर्मा मेरा नाम अंजू है। मैं बीस साल …
काम भी अपना- दाम भी अपने
मेरा नाम संदीप है। मैं वैसे तो जयपुर में नौकरी कर…
दिल करता है कि बस
दोस्तो, मेरा नाम समीर है। आज मैं आपको मेरे और मेरी…
ममेरी बहन के संग
प्रेषक : शिमत सबसे पहले तो मैं गुरूजी को धन्यवाद कह…
क्या छिपा रहे हो?
सभी आंटियों और लड़कियों की फड़कती चूतों को मेरा प्या…
मेरा जादू चल गया
लेखिका : लक्ष्मी कंवर मैं तीस वर्षीया शादीशुदा स्त्री …
ऐसी दुल्हन चाहिए
लेखक : बदतमीज़ न गोरी न साँवली, इक छैल-छबीली दुल्हन…