दो दीवाने-1
प्रेषक : प्रेम सिसोदिया अजय मेरा अच्छा दोस्त था। हम द…
मैं और मेरे विद्यार्थी-2
अगले दिन मैंने महिमा को रोहित के साथ आने को कह दि…
दो दीवाने-2
प्रेषक : प्रेम सिसोदिया “तो क्यों नहीं किया यार, मेर…
मेरी सहेली-2
प्रेषिका : कामिनी सक्सेना सहयोगी : रीता शर्मा मेरी …
रिम्पी और उसका परिवार-2
प्रेषक : रुबीन ग्रीन फिर उसी दिन शाम के समय फिर से …
रिम्पी और उसका परिवार-4
प्रेषक : मनीष जैन (रुबीन ग्रीन) दोस्तो, आपने मेरी कह…
रिम्पी और उसका परिवार-3
प्रेषक : रुबीन ग्रीन आग़ दोनों ओर लगी थी। मैं तो अपन…
वफ़ा या हवस-2
शैलीन की आवाज़ से अचानक मेरा ध्यान भंग हुआ। मुझे दे…
भाभी ने मेरी मार दी-1
प्रेषक : विजय पण्डित हम दोनों पड़ोसी थे, एक ही कॉलेज…
वफ़ा या हवस-4
शैलीन- जल्दी से फ्रेश हो जाओ! मैं- क्यों भाभी? शैलीन…