दिल का क्या कुसूर-5
आखिर इंतजार की घड़ी समाप्त हुई और बुधवार भी आ ही ग…
दोस्त की गोद भर दी
सूरज मेरा नाम सूरज (बदला हुआ) है, मैं रोज अपने मो…
नेहा को माँ बनाया
प्रेषक : समीर दोस्तो, यह अन्तर्वसना पर मेरी पहली कहान…
एक माह चाची के घर
दोस्तो, नमस्कार ! मैं चक्रेश यादव अपनी नई कहानी के स…
दोस्ती का उपहार-3
प्रेषक : विनय पाठक मैं आपको अपनी पिछली कहानी में ब…
गेटपास का रहस्य-1
सुनीता की शादी होने के बाद एक बार फिर से मैं तन्हा…
गेटपास का रहस्य-3
दीप के जाने के बाद मैंने किताब को एक तरफ रखी और म…
गेटपास का रहस्य-5
मुझे मयूरी से मिले हुए दो दिन हो गए थे हमें ऐसा क…
गेटपास का रहस्य-6
दीप ने मुझसे कहा- भाई आप ऊपर वाले कमरे में चले जा…
गेटपास का रहस्य-2
दीप ने मयूरी के कान में कहा- क्यों क्या हुआ? पसंद न…