मेरा फ़र्ज़, उसका फ़र्ज़

बेंगलौर स्थित महात्मा गांधी रोड हर किसी की जुबां पर…

जेब में सांप-2

कहानी का पहला भाग: जेब में सांप-1 मैंने अपनी स्पी…

स्वयंवर का सच-1

लेखक : प्रेम गुरु और अरमान मैं जानता था कि यह राखी…

स्वयंवर का सच-2

लेखक : प्रेम गुरु और अरमान मैंने झट से अपने कपड़े उ…

बहन का लौड़ा -35

अब तक आपने पढ़ा.. ममता- आह.. आईईइ.. राजा जी.. आह ग…

पाँच सौ का नोट

सभी पाठकों को मेरा नमस्कार, पाठिकाओं को मेरे खड़े ल…

क्रिसमस पार्टी

लेखिका : शालिनी मैं और पूजा क्रिसमस के दिन घर पर ह…

अरमान पूरे किए

प्रेषक : अरमान सबसे पहले सभी को हाथ जोड़ कर नमस्ते। …

छप्पर फाड़ कर-1

सुगंधा को वापस उसके छात्रावास छोड़ने के बाद मैं सभी…

छप्पर फाड़ कर-2

मैंने उसके उरोजों को सहलाना शुरू किया। उरोज क्या थ…