Search Results for "बेटे-ने-किया-रेप-माँ-का"
काशीरा-लैला -5
चुम्मा तोड़ कर मैंने पूछा “कैसी लगी मेरी गांड चचाजी…
मसक कली मौसी-1
लेखिका : श्रेया आहूजा मेरा नाम बरखा है ! अभी मैं र…
पायल की बज गई पायल
प्रेषक : रवि पटेल सभी अन्तर्वासना पाठकों को मेरा नमस्…
यह मधुर कसक-2
चम्पा को चोद लेने के बाद मेरे दिलो दिमाग पर अब गंग…
महकती कविता-1
रोहण अपने तबादले पर कानपुर आ गया था। उसे जल्द ही ए…
मौसम की करवट-5
सुबह हुई, हमेशा की तरह रिया पहले उठी। फ़िर उसने प्र…
यह कैसा मोड़-2
प्रेषक : विजय पण्डित “यह तो गार्डन है… किसी ने देख ल…
काशीरा-लैला -1
चचाजान का खत आया कि वो तीन चार दिन के लिये हमारे …
मसक कली मौसी-2
मैं : ना मौसी ना ! मेरी फ़ट जा गी ! तू मन्ने बख्श दे…
मासूम यौवना-4
मासूम यौवना-3 से आगे : रात के ग्यारह बज गए थे, जीज…