कलयुग की लैला-1
अंधेरे में एक साया एक घर के पास रुका और सावधानी स…
बेईमान दिल
प्रेषिका : यशोदा पाठक मैं अब बड़ी हो गई हूँ। मेरी म…
तांत्रिक की साधना
प्रेषक : अरनब बनर्जी मैं अन्तर्वासना की एक नियमित पाठ…
रानी के साथ एक रात
कई सालों के बाद मैं अपने मामा के पास गया था। मेरे…
रीना ने अपनी सील तुड़वाई
हैलो दोस्तो, मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि …
अमृतसर की कमसिन हसीना सौतेले बाप के साथ बिस्तर में
मैं अंतर्वासना की नियमित पाठिका हूँ और रहूंगी क्यूं…
बारिश और खूबसूरत चाची
वक़्त इंसान से कुछ भी करवा सकता है! इस बात का अंदाज…
बहुत जोर से करते हो
दोस्तो, आज मैं अपनी कहानी आप को पहली बार लिख रहा ह…
खुजली मैं दूर कर दूंगा !
दोस्तो, मेरी पिछली कहानी बस में दो आंटी के साथ मज़ा…
वो कच्ची कलियाँ तोड़ गया
प्रेषिका : सिमरन सिंह मेरा नाम सूर्यप्रभा है, मैं अट्…