मस्त काम वाली सोना बाई
प्रेषिका : कामिनी सक्सेना सोना कई वर्षों से घर में न…
कहीं पे निगाहे कहीं पे निशाना-2
लेखिका : नेहा वर्मा “ओह ! मरना ही है तो यहाँ नहीं,…
अंग्रेजन को साड़ी पहनाई
प्रेषक : ऋषि मैं अन्तर्वासना का नया पाठक हूँ। कुछ कह…
मामी की बुर के मोटे होंठ
यह बात कोई 6 महीने पहले की है लेकिन है बिल्कुल सच्च…
रास्ते में मिली एक हसीना-1
लेखक : जय कुमार मैं जय कुमार कालबाय हूँ और एक बा…
जा क्यों नहीं रहा है?
दोस्तो, मैं अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूँ। मैंने अन्…
वेब से बेड तक-1
प्रेषक : लव गुरू मेरी यह कहानी काल्पनिक है। इस कहान…
मेरा प्रिय पति
लेखिका : नेहा वर्मा मेरी शादी हुए करीब दस साल हो ग…
यूँ ही अचानक
लेखक : आरव रावत मैंने कई कहानियाँ अन्तर्वासना में …
ममेरी बहन के संग
प्रेषक : शिमत सबसे पहले तो मैं गुरूजी को धन्यवाद कह…