कमाल की हसीना हूँ मैं-24

मैं उसके लंड की टिप को अपनी चूत की दोनों फाँकों क…

चूत एक पहेली -56

अब तक आपने पढ़ा.. पुनीत- अरे तेरी जवानी तो ऐसी है.…

मेरा गुप्त जीवन- 120

कम्मो बोली- छोटे मालिक, अब कुछ दिन तो आपको यह दूध …

ऑनलाइन के बाद पलंग तोड़ चुदाई फिर से -1

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा एक बार फिर नमस्कार…

कमाल की हसीना हूँ मैं-32

“आज मैं आपके बेटे की बीवी हूँ।” “लेकिन पहले तू मे…

कमाल की हसीना हूँ मैं-16

“शहनाज़ ! बहुत टाईट है तुम्हारी…” कहते हुए फिरोज़ भा…

गाँव की नासमझ छोरी की मदमस्त चुदाई -4

अब तक आपने पढ़ा.. अब मैंने बिल्लो को उल्टा लिटा दिया…

मकान मालकिन और उसके बेटे की चुदास -2

अब तक आपने पढ़ा.. ‘रवि.. मैं कहती हूँ.. तुम इसी पल…

कमाल की हसीना हूँ मैं-34

“मम्मऽऽऽ… शहनाज़… मीऽऽऽऽ… ऊँमऽऽऽऽ… तुम बहुत सैक्सी ह…

नवाजिश-ए-हुस्न-3

लेखक : अलवी साहब पूरी बस खाली थी, हम दोनों अन्दर अ…