मैं, मेरी बीवी और चचेरे भाई का सपना हुआ सच -9

नीलेश और मधु एक एक हाथ मेरे अंडकोष पर और मधु को द…

मेरा गुप्त जीवन- 165

शाम सिंह जी नीचे उतर आये और मैं यह देख कर हैरान ह…

काशीरा-लैला -1

चचाजान का खत आया कि वो तीन चार दिन के लिये हमारे …

मधुर प्रेम मिलन-2

प्रेषिका : स्लिमसीमा ‘मधुर, क्या मैं एक बार आपके हाथ…

चूत एक पहेली -88

अब तक आपने पढ़ा.. पुनीत- बस बस.. ज़्यादा उछल मत.. अभ…

अनजानी और प्यासी दिव्या-1

मेरी पिछली कहानी स्नेहल के कुँवारे बदन की सैर को आ…

अब बहन की चूत से शर्र शर्र की आवाज खुल कर आती है

नमस्कार, मैं अनुराग फिर से आपकी सेवा में एक नई कहा…

अगर उस दिन मैं दरवाजा खोल देती

कई बातें ऐसी होती हैं जो बीत जाने के बाद बरसों तक…

ऑनलाइन चेटिंग में मिली

प्रेषक : हेमन्त जैन हेलो दोस्तो, आज मैं आप सबके सामन…

मेरी प्यारी कान्ता चाची

प्रेषक : आर्यन सिंह मेरे प्यारे दोस्तो, आज मैं आपको अ…