तीन पत्ती गुलाब-28

मधुर का जन्मदिन उत्सव और गुलाब की दूसरी पत्ती मेरे प…

Drishyam, ek chudai ki kahani-18

पिछली बार जब कालिया ने सिम्मी की चुदाई की थी उस बा…

कुलबुलाती गांड-1

मेरी पिछली कहानी थी डॉक्टर साहब की गांड मराने की त…

तीन पत्ती गुलाब-25

कई बार मुझे संदेह होता है कहीं मधुर जानबूझ कर तो …

तीन पत्ती गुलाब-26

गौरी ने शरमाकर अपनी आँखों पर हाथ रख लिए। गौरी की …

Drishyam, ek chudai ki kahani-21

कालिया ने एक हल्का धक्का मार कर सिम्मी की गीली चिकनी…

Drishyam, ek chudai ki kahani-23

दूसरे दिन सुबह! कालिया सुबह चार बजे ही घर से निकल…

मेरी बीवी की उलटन पलटन-8

सुबह चौधरी को कुछ काम था, मैं सो के उठी तो वो जा …

Drishyam, ek chudai ki kahani-17

जैसे ही अर्जुन वहाँ से निकला की सिम्मी ने कमरे का द…

शहर में जिस्म की आग बुझाई- 3

मेरे पति के बॉस मेरे जिस्म की आग को ठंडी करने वाले…