पेशाबघर
रंगबाज़ आज मैं आप सबको सत्य घटना पर आधारित कहानी सु…
अपना सपना सच हुआ
मुझमें हमेशा से एक दिली इच्छा थी कि गाँव की खूब लं…
तेरा साथ है कितना प्यारा-6
अच्छा खासा फंक्शन चल रहा था, अचानक मेरी सास मेरी मम्…
शबाना की चुदास
यह कहानी शबाना नाम की एक लड़की ने मुझे भेजी थी, जो…
मेरा गुप्त जीवन- 112
अगले दिन पापा ने मुझको नाश्ते के टेबल पर बताया- बॉ…
बदलते रिश्ते -5
अनीता अपने ससुर की पक्की चेली बन गई। अब वह ससुर के…
बदलते रिश्ते -3
बहू के नितम्बों को सहलाने के बाद तो उसका भी तनकर ख…
चुदाई से परिचय-2
कहानी का पहला भाग: चुदाई से परिचय-1 माँ ने मुझे र…
बदलते रिश्ते-1
अनीता नई-नवेली दुल्हन के रूप में सजी-सजाई सुहागरात…
तेरा साथ है कितना प्यारा-7
‘व्व्वो मैं क््क्कु…छ…नहींईईइ…’ बस इतना ही फूटा मुकु…