छैल छबीली-1

“सुनो भाई, कोई कमरा मिलेगा?” “वो सामने पूछो!” मैं…

Bahot Bada Dhokha

Hi mere pyare dosto, maine Sarla aaj fir aap ke l…

मुम्बई से दुबई- कामुक अन्तर्वासना-8

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि ट्रेन में एक लड़की मिली ज…

एक सफ़र

प्रेषक : गुल्लू जोशी बस में कोई खास भीड़ तो नहीं थी,…

लिंगेश्वर की काल भैरवी-2

(एक रहस्य प्रेम-कथा) लिफ्ट से नीचे आते मैं सोच रहा थ…

पतिव्रता नारी-1

लेखिका : नेहा वर्मा मैं दिल्ली में एक ऑफ़िस में काम …

प्रेम और पिंकी का प्यार-3

प्रेषक : प्रेम मैं- ओह पिंकी, मैं बस आने वाला हूँ !…

जिन्दगी के दो हसीन तोहफे-1

कैसे हो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राज एक बार फिर से आप…

वो बुरके वाली

नमस्कार दोस्तो, सबसे पहले आप सबका धन्यवाद करता हूँ क…

कांच का टूटना अधूरा शुभ होता है

नमस्कार दोस्तो.. मैं आपके लिए परिचित तो नहीं हूँ.. …