जिस्मानी रिश्तों की चाह-50

सम्पादक जूजा तीन दिन से आपी हमारे कमरे में नहीं आई…

चुदाई की कमाई

मैं अपने कॉलेज में होने वाले टेस्ट की तैयारी कर रह…

स्वयंवर का सच-2

लेखक : प्रेम गुरु और अरमान मैंने झट से अपने कपड़े उ…

महकती कविता-3

महकती कविता-1 महकती कविता-2 कविता ने लण्ड को फिर …

अन्तर्वासना की प्रशंसिका का इंटरव्यू-3

हम दोनों एक होटल में रुक गए और मैंने अर्श को कमरे …

इब तो बाड़ दे -1

प्रेम गुरु द्बारा सम्पादित एवं संशोधित प्रेषक – जीत श…

मेरी सहकर्मी वंशिका

मेरे ऑफिस की जन संपर्क अधिकारी का नाम वंशिका है। च…

अन्तर्वासना की प्रशंसिका का इंटरव्यू-5

अर्श को पेशाब लगी थी मैं उससे अपने मन की बात कही औ…

जिस्म की मांग-3

प्रेषिका : लीला एक के बाद जब मैंने दूजे से नाता जो…

जिस्मानी रिश्तों की चाह-51

सम्पादक जूजा अब तक आपने पढ़ा.. आपी ने मेन गेट के पा…