नवाजिश-ए-हुस्न-3
लेखक : अलवी साहब पूरी बस खाली थी, हम दोनों अन्दर अ…
कमाल की हसीना हूँ मैं-27
अभी दो महीने ही हुए थे कि मैंने अपने ससुर ताहिर अ…
कमाल की हसीना हूँ मैं-24
मैं उसके लंड की टिप को अपनी चूत की दोनों फाँकों क…
मेरा गुप्त जीवन- 143
अगले दिन इतवार था और दोपहर को डांस प्रैक्टिस करने व…
प्रीति चूत चुदाने को मचल रही थी
नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम बबलू है, मैं एक प्रसिद्ध कंपन…
दीवानी मोटे हथियार की
प्रेषक : राज कार्तिक हाय दोस्तो… आपकी शालिनी भाभी एक…
भाई ने मेरी चूत चोद कर मेरी अन्तर्वासना जगा दी -5
हाय, मैं ऋतु.. अन्तर्वासना पर मैं अपनी चूत की अनेक …
वासना की न खत्म होती आग -4
अब तक आपने पढ़ा.. अब मैं सिर्फ पैन्टी में थी और उन्हो…
कमाल की हसीना हूँ मैं-15
मैंने उन्हें सताने के लिये उनके लंड के टोपे पर हल्क…
मेरा गुप्त जीवन- 142
कोई दस मिन्ट के खेल के बाद ही रति फिर चुदाई के लिए…