प्यासी दुल्हन -2
दस दिन बाद मेरा बैंक का पेपर लखनऊ में था। मेरी को…
जिस्मानी रिश्तों की चाह-40
सम्पादक जूजा मैंने दो उंगलियाँ आपी की चूत में दाखि…
ये दिल … एक पंछी-2
प्रेषिका : निशा भागवत “ओह्ह्ह ! मैं तो गई…” “प्लीज नि…
प्यासी उर्वशी
प्रेषक : करन सिंह सभी आदरणीय पाठकों को मेरा अभिवाद…
धोखेबाज गर्लफ़्रेन्ड को खुल्लम-खुल्ला चोदा
दोस्तो, मेरा नाम राम है और मैं कन्नौज का रहने वाला …
वो सात दिन कैसे बीते-1
साल भर हो गया शायद, मेरी अंतिम कहानी को छपे… ऐसा …
जिस्मानी रिश्तों की चाह-38
सम्पादक जूजा अब तक आपने पढ़ा.. आपी ने मेरी मुठ मार …
हाय मेरी शुकू शू
प्रेम गुरु की कलम से … मैं जानता हूँ कोई भी लड़की ह…
कैसी मेरी दीवानगी
मैं हूँ चंदना, अन्तर्वासना की बहुत बड़ी बड़ी बड़ी प्रशं…
वो सात दिन कैसे बीते-4
गौसिया स्खलित होने के बाद सनसनाते दिमाग के साथ बेज…