नया मेहमान-3
मैं घर चला आया, मेरा दूसरा कदम भी कामयाब रहा। घर …
कमाल की हसीना हूँ मैं-24
मैं उसके लंड की टिप को अपनी चूत की दोनों फाँकों क…
आज दिल खोल कर चुदूँगी- 18
अब तक आपने पढ़ा.. मैं महमूद से लिपट कर बुर का पानी…
मेरा गुप्त जीवन- 132
कम्मो ने सब लड़कियों को कपड़े पहनने के लिए बोला और ह…
कमाल की हसीना हूँ मैं-32
“आज मैं आपके बेटे की बीवी हूँ।” “लेकिन पहले तू मे…
कमाल की हसीना हूँ मैं-16
“शहनाज़ ! बहुत टाईट है तुम्हारी…” कहते हुए फिरोज़ भा…
प्रेमिका की चूत चुदाई उसके घर में
तो दोस्तो, एक बार फिर आप सब के सामने आपका प्यारा शर…
चूत गान्ड और लन्ड की लीला मकान मालिक की बेटी संग
मैं 33 साल का एक शादी-शुदा आदमी हूँ। मैं तब दिल्ली…
कमाल की हसीना हूँ मैं-34
“मम्मऽऽऽ… शहनाज़… मीऽऽऽऽ… ऊँमऽऽऽऽ… तुम बहुत सैक्सी ह…
नवाजिश-ए-हुस्न-3
लेखक : अलवी साहब पूरी बस खाली थी, हम दोनों अन्दर अ…