मेरी चालू बीवी-64

सम्पादक – इमरान मैंने बड़े प्यार से उससे उसका नाम पू…

तेरा साथ है कितना प्यारा-5

आशीष भी नितम्ब उठाकर मेरा साथ देने लगे। आशीष के नि…

धोबी घाट पर माँ और मैं -10

मुझे तो ज़ल्दी से माँ के साथ सोने की हड़बड़ी थी कि कै…

तेरा साथ है कितना प्यारा-3

आशीष ने मुझे पीछे घुमाकर मेरी ब्रा का हुक कब खोला …

भाभी की गीली पैन्टी -4

कहानी का पहला भाग : भाभी की गीली पैन्टी -1 कहानी क…

दोस्ती और प्यार के बीच का अहसास-1

हैलो दोस्तो.. वैसे तो मैं अन्तर्वासना बहुत सालों से …

मेरी वृंदा की जी भर के चुदाई

अर्जुन हैलो दोस्तो, मेरे खड़े लण्ड से सभी रसीली चूत व…

बहन का लौड़ा -67

अभी तक आपने पढ़ा.. दोस्तो, अगर आप लड़के हो तो प्लीज़ क…

मेरे लण्ड का नसीब -3

अब तक आपने पढ़ा.. कुछ देर बाद हम दोनों बाथरूम में …

धोबी घाट पर माँ और मैं -9

शाम होते-होते हम अपने घर पहुंच चुके थे। कपड़ों के …