राज़ की एक बात
प्रेषक : समीर सर्वप्रथम आप सभी को मेरी ओर से प्यार भर…
आतिथ्य-1
प्रेषक : महेश शर्मा दोस्तो नमस्कार ! आज मैं अपना एक स…
लव की आत्मकथा-2
दिसम्बर का महीना था मैं अपने गाँव गया हुआ था। एक द…
विवशता
प्रेषक : रोमियो नमस्कार यह मेरी पहली कहानी है, अन्तर्…
मेरा गुप्त जीवन- 91
गाड़ी अपने ठीक समय पर लखनऊ पहुँच गई और हम सब एक दू…
प्यास भरी आस: एक चाह-3
उसने कहा- अच्छा जी? इतना घमण्ड है खुद पर? मैं बोला-…
मेरा गुप्त जीवन -94
अगले दिन कॉलेज गया तो सबसे पहले मैंने ऑफिस में पू…
आज दिल खोल कर चुदूँगी- 15
अब तक आपने पढ़ा.. सुबह तक मेरे शरीर में मानो जान ह…
जिन्दगी के दो हसीन तोहफे-2
रेखा भाभी की चूत मेरे वीर्य से पूरी भर गई और भाभी …
शराबी पति-3
शराबी पति-1 शराबी पति-2 शाम चार बजे मेरे ससुर आ…