तीसरी कसम-8

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना रेशम की तरह कोमल और मक्खन…

तीसरी कसम-3

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना ‘पलक…’ ‘हुं…’ ‘पर तुम्हें…

पड़ोसन की प्यास

लेखक : अखिलेश कुमार मैं अखिलेश कुमार, दिल्ली का नि…

फेसबुक सखी-3

स्नेहा रीमा से बात करने लगी। स्नेहा अपने बिस्तर पर ल…

तीसरी कसम-7

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना “जिज्जू ! एक बात सच बोलूँ…

इम्तिहान की टैंशन

प्रेषक : यश हाय दोस्तो, मेरा नाम यश है, यह मेरी पहल…

तेरी याद साथ है-25

मैंने जल्दी से रिंकी को खुद से अलग किया और फिर उसे…

तेरी याद साथ है-24

“उम्म… हम्म्म्म…” फिर से वही मादक सिसकारी लेकिन इस बा…

चाण्डाल चौकड़ी के कारनामे-2

मैंने समझ तो लिया ही था कि ये चाहती क्या है इसलिए …

तीसरी कसम-1

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना हज़ारों साल नरगिस अपनी बे…