खेली खाई मेहनाज़ कुरैशी
इमरान यह कहानी मेरे एक दोस्त संजय अग्रवाल की है, आप…
कामदेव के तीर-2
रजिया के जाने के बाद हमने नाश्ता किया, फिर ऊपर वाल…
भैया जी अब मेरे सैंया जी
प्रेषिका : पायल गुप्ता अन्तर्वासना के सभी पाठकों को प…
कामदेव के तीर-5
मैं पलंग से उठा ही था तभी रजिया मेरे लिए चाय लेकर…
गदराई लंगड़ी घोड़ी-4
बबिता ने फिर से अपने दोनों हाथ अपने घुटनों पर रख …
मैडम ने गुरु दक्षिणा में लन्ड मांगा
हाय फ्रेंड्स.. मैं जुनेद भोपाल से हूँ। आज मैं आप सब…
कामदेव के तीर-4
घर में किसी के आने का कोई अंदेशा नहीं था, बड़ी निश्…
मेरा गुप्त जीवन- 133
मधु मैडम और रूबी मैडम ने हम सबको आलिंगनबद्ध किया औ…
Debikar Sathe Nisidhdho Prem
Bondhura abar fire aslam notun golpo niye. Ar age…
सम्पूर्ण काया मर्दन, सन्तुष्टि-1
मूल लेखक : सिद्धार्थ वर्मा सम्पादन सहयोग : उर्मिला अन्त…