हरिद्वार से टिहरी- एक अधूरी हसरत

सभी दोस्तों को मेरा हार्दिक प्रणाम। मैं अपनी प्रथम सच्…

मेरा गुप्त जीवन -29

मैं दो औरतों को चोद कर उनके बीच खड़े लंड को लेकर ल…

क्या यही प्यार है-1

अन्तर्वासना पढ़ने वालों को मेरा नमस्कार ! मैं अन्तर्वास…

धोबी घाट पर माँ और मैं -13

माँ एक बार जरा पीछे घूम जाओ ना!’ ‘ओह, मेरा राजा म…

हरजाई मधु मेरी मम्मी

यह बात उस समय की है, जब मैं बहुत छोटा था, मेरे घर…

चूत की झांटें साफ करके चोदा

प्रिय पाठको, आपको मेरा प्रणाम! आप सभी आजकल किसी ना …

ममेरी बहन की जबरदस्त चुदाई

आप सभी को मेरा नमस्कार! वैसे तो मैं इस साईट का बहु…

जवानी में चूत-लण्ड का खेल

दोस्तो.. मैं अन्तर्वासना का रेग्युलर पाठक हूँ, मैं अह…

मेरी चालू बीवी-99

सम्पादक – इमरान अच्छी तरह से मूतने के बाद वो हसीना …

अंतहीन प्यास-3

आपकी सारिका कंवल बारिश इतनी तेज़ हो चुकी थी कि 4 ल…