तीसरी कसम-2

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना हे लिंग महादेव ! अगर मुझ…

कामना की साधना-7

मैंने अपना एक हाथ बाहर निकला कर ऊपर किया और तर्जनी…

कामना की साधना-6

मेरे पास अब सोचने का समय नहीं था। किसी भी क्षण मेर…

बुआ ने अपना पति माना

कैसे हो दोस्तो! यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम नम…

लिव इन कैरोल-1

मुकेश कुमार प्यारे पाठको, मेरी पहली आपबीती हैप्पी च…

कली से फूल-2

लेखक : रोनी सलूजा हम दोनों लॉज में एक डबलबेडरूम ल…

असीमित सीमा-3

लेखक : जवाहर जैन अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा …

दूसरी विदाई

हाय दोस्तो, काम के सिलसिले में मुझे झारखण्ड के एक छ…

उमर ही ऐसी है !

6 इंच बड़ा लण्ड कभी होता नहीं है पर दुनिया वाले बोल…

मेहमानघर-2

लेखक : नितेश शुक्ला अनजाने में मुझ से ज़रा ज़ोर से स्…