व्यंग्य कथा : अकबर और बीरबल

बादशाह अकबर का दरबार लगा हुआ था, सारे दरबारी अपने…

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-4

मालकिन और नौकर का भेदभाव जाता रहा, उस नौकर राजू न…

मुझे तो तेरी लत लग गई

यह आपबीती मुझे मेरे दोस्त जय पाण्डेय ने भेजी है… और…

दिल का क्‍या कुसूर-7

उन्‍होंने अपने हाथ से मेरी ठोड़ी को पकड़ कर ऊपर किया…

सहारनपुर की मस्त भाभी

हेलो दोस्तो, आपका प्यारा और सेक्सी चूतों का दीवाना फ…

दिल का क्‍या कुसूर-5

आखिर इंतजार की घड़ी समाप्‍त हुई और बुधवार भी आ ही ग…

करन की सीमा

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम करन है। मैंने अन्तर्वासना पर…

आज कुछ तूफानी करते हैं !

श्रेया आहूजा का आप सभी को सलाम ! यह आपबीती है मेरे…

दिल का क्‍या कुसूर-8

तभी अचानक मुझे अपने अन्‍दर झरना सा चलता महसूस हुआ।…

दिल का क्‍या कुसूर-2

संजय मेरे ऊपर आकर लगातार धक्‍के लगा रहे थे… अब मेर…