जिस्म की जरूरत-8

‘उफ्फ… बड़े वो हैं आप!’ रेणुका ने लजाते हुए कहा और …

मेरा गुप्त जीवन-100

कुछ दिन हम सब बहुत व्यस्त रहे क्यूंकि 15 दिन के लिए …

तू मेरे पति से, मैं तेरे पति से चुदूँगी -2

चूँकि मैं अपने पति ॠषभ का स्वभाव जानती थी, इसलिए न…

ट्रेनिंग सेण्टर की प्रेम-चुदाई

मेरा नाम विजय है, मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ। म…

मैं रिश्ते-नाते भूल कर चुद गई-3

सारिका कँवल मैंने और तड़प कर छटपटाने की कोशिश की, …

अब प्यार न कर पाएँगे हम किसी से

सर्वप्रथम तो मैं आप सभी का आभार व्यक्त करना चाहूँगा क…

मेरा गुप्त जीवन-104

रात को मैं बड़ी गहरी नीद में सोया था लेकिन मुझको य…

गाँव की प्यासी आंटी

अन्तर्वासना को मेरा बहुत नमस्कार मैं अन्तर्वासना का नि…

जिस्म की जरूरत-9

मैं मज़े से उनकी चूत चाट रहा था लेकिन मुझे चूत को …

आज दिल खोल कर चुदूँगी -5

उसने अपना लन्ड मेरे मुँह में से निकाला और बोला- बो…