तीन पत्ती गुलाब-33

भाभी धीरे-धीरे अपने भारी और मोटे नितम्बों को नीचे …

तीन पत्ती गुलाब-37

मुझे पहले तो थोड़ा संशय था पर अब तो मैं पूरे यकीन …

ये दिल … एक पंछी-2

प्रेषिका : निशा भागवत “ओह्ह्ह ! मैं तो गई…” “प्लीज नि…

जिस्म की जरूरत-19

मैंने भी उसकी इच्छा का पूरा सम्मान किया और जितना हो…

चाची की चूत की वासना

यह जो स्टोरी लिखने जा रहा हूँ वो कल की ही बात है, …

डर के आगे चूत है

डर के आगे चूत है? आप सोच रहे होंगे कि मैंने गलत ल…

तीन पत्ती गुलाब-38

हे लिंग देव !!! आज तो तुमने सच में ही लौड़े लगा ही…

मधुर प्रेम मिलन-4

प्रेषिका : स्लिमसीमा फिर उन्होंने अपने मुन्ने को मेरी…

कानून के रखवाले-7

प्रेषक : जोर्डन आरती (सफेद सलवार-कमीज़ में)- भाभी जल्…

शीशे का ताजमहल-1

शबनम का बैठकखाना खूबसूरती से सजा हुआ था, कमरे की …