जन्मदिन का उपहार

प्रेषक : मुकेश कुमार दोस्तो, आज मैं अपनी सच्ची कहानी…

तीन पत्ती गुलाब-40

मैंने कसकर गौरी की जांघें पकड़ ली। गौरी का शरीर अब…

ये दिल … एक पंछी-2

प्रेषिका : निशा भागवत “ओह्ह्ह ! मैं तो गई…” “प्लीज नि…

मैं सुहासिनी हूँ

प्रेषिका : सुहासिनी मेरा नाम सुहासिनी है और मैंने …

जिस्म की जरूरत -27

मेरे मन में कई ख्याल उमड़े, फिर कुछ समझ आया कि वंदन…

तू नहीं और सही-2

प्रेषिका : दिव्या डिकोस्टा उसकी गीली झांटों से मेरे …

चाची के घर में-2

प्रेषक : राजेश अय्यर मेरे प्यारे दोस्तो और देवियो व भ…

मैं क्यों शरमाऊँ

प्रेषक – विजय कुमार हाय, मेरा नाम विजय है। मैं द्वि…

चूत की खिलाड़िन-1

उषा मस्तानी रसीली की रसभरी रातें के आगे पढ़िए ! घर …

अहसान के बोझ तले

प्रेषक : सिम्मी मेरा नाम रूद्र प्रताप है मैं एक मध्यमव…