तीन पत्ती गुलाब-1

प्यारे पाठको और पाठिकाओ! इस कथानक की नायिका नाम है…

एक और अहिल्या-3

“फिर तो एक ही चारा बचा है और मुझे पता नहीं कि यह …

तीन पत्ती गुलाब-2

आज पूरा दिन गौरी के बारे में सोचते ही बीत गया। उस…

तीन पत्ती गुलाब-3

मैंने अपने और मधुर के दुश्मनों को (अरे भाई कपड़ों क…

सेक्स के तीन रंग

दोस्तो, मैं दिल्ली में रहती हूँ, शादीशुदा हूँ। मेरे…

तीन पत्ती गुलाब-4

इस भयंकर प्रेमयुद्ध के बाद सुबह उठने में देर तो होन…

टी वी की सुधराई

प्रेषक : अतुल अग्रवाल अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ने के…

तीन पत्ती गुलाब-5

ये साली नौकरी भी जिन्दगी के लिए फजीता ही है। यह अज…

तीन पत्ती गुलाब-6

मधुर आज खुश नज़र आ रही थी। मुझे लगता है आज मधुर ने…

तीन पत्ती गुलाब-7

इस वाक्य का अर्थ मेरी समझ में नहीं आ रहा था। पता नह…