मेरा गुप्त जीवन- 110

कम्मो मुस्कराते हुए बोली- मैं उस दिन ही समझ गई थी क…

वो काला भुसण्ड लौड़ा

लेखिका : शमीम बानो कुरेशी इन दिनों मेरे मौसा जी आ…

नीतू और मेरा तन-मिलन

लेखक : लवली सिंह दोस्तों मैं लवली, फगवाड़ा पंजाब, स…

वो स्कूल का पहला दिन

Vo School Ka Pahla Din दसवीं के बाद मैंने स्कूल बद…

मेरा गुप्त जीवन- 129

थोड़ी देर में दोनों मैडम आ गई, आते ही दोनों ने मुझ…

विधवा आंटी का प्यार

नमस्कार दोस्तो, मैं रवि (बदला हुआ नाम) उत्तराखंड के …

असगर मियां की ठर्क-1

यह कहानी हमारे ही मोहल्ले में राशन की दुकान चलाने …

असगर मियां की ठर्क-2

मेरे प्यारे दोस्तो, आप सब ने मेरी लिखी कहानी असगर म…

कलयुग का कमीना बाप-11

पापा मेरी चूत को कुछ देर चाटने के बाद ऊपर उठे और …

कलयुग का कमीना बाप-10

एक दिन पापा मुझे शॉपिंग कराने ले गये और ढेर सारी …